Karmic Story In Hindi: कर्म फल सबको मिलता है, एक सच्ची और दिल को छू लेने वाली कहानी

Karmic Story In Hindi: इस दुनिया में जो भी हमारे जीवन में आता है, चाहे वो बेटा हो, बेटी हो, दामाद हो या बहू, सब कर्मों का हिसाब लेकर आते हैं। जिसका हमारे साथ कर्मों का लेना देना होता है वही हमारी ज़िंदगी में आता है और जब लेना देना पूरा हो जाता है तो चला भी जाता है। यह कोई मनगढ़ंत बात नहीं है, यह जीवन का सबसे बड़ा सच है। आज हम आपको एक ऐसी कहानी सुनाएंगे जो आपको अंदर तक सोचने पर मजबूर कर देगी।

राजेश और उसका घमंड

राजेश एक बहुत अमीर आदमी था। उसके पास बड़ा घर था, अच्छी गाड़ी थी और बैंक में ढेर सारा पैसा था। लेकिन उसके मन में एक बहुत बड़ी कमज़ोरी थी, वो था उसका घमंड। वो हमेशा यही सोचता था कि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है और जो उसके पास पैसा नहीं है वो उसके सामने कुछ भी नहीं है।

उसके बूढ़े माँ बाप गाँव में रहते थे। राजेश शहर में अपनी बड़ी सी कोठी में रहता था लेकिन उसने कभी पलटकर माँ बाप की खोज खबर नहीं ली। त्योहार आते थे, जाते थे लेकिन राजेश के घर का दरवाज़ा माँ बाप के लिए कभी नहीं खुला।

बेटे का जन्म और उम्मीदें

कुछ सालों बाद राजेश के घर एक बेटे ने जन्म लिया। राजेश की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने सोचा कि यही बेटा उसका सहारा बनेगा, उसकी देखभाल करेगा और उसका नाम रोशन करेगा। उसने बेटे को बड़े लाड़ प्यार से पाला, महँगे स्कूल में पढ़ाया और हर ख्वाहिश पूरी की।

राजेश की पत्नी सुमन कभी कभी कहती थी कि अपने माँ बाप को भी याद करो लेकिन राजेश हमेशा यह कहकर टाल देता था कि उनके लिए पैसे भेज देता हूँ, बस यही काफी है। पैसे तो वो भेज देता था लेकिन वो प्यार, वो अपनापन और वो साथ कभी नहीं दिया जो बूढ़े माँ बाप को चाहिए था।

माँ की आखिरी साँसें

एक दिन गाँव से खबर आई कि राजेश की माँ बहुत बीमार हैं और उन्हें राजेश की ज़रूरत है। पड़ोसियों ने फ़ोन किया, रिश्तेदारों ने समझाया लेकिन राजेश ने कहा कि मैं डॉक्टर का इंतज़ाम कर देता हूँ, अभी मेरे पास वक्त नहीं है। उसी रात माँ ने आखिरी साँस ली और इस दुनिया से चली गईं। जाते जाते उनकी आँखें दरवाज़े की तरफ थीं, शायद वो अपने बेटे का इंतज़ार कर रही थीं।

राजेश जब पहुँचा तब बहुत देर हो चुकी थी। उस रात पहली बार राजेश फूट फूटकर रोया लेकिन अब पछताने से क्या फायदा था।

बेटे ने आईना दिखाया

साल बीतते गए। राजेश का बेटा अर्जुन पढ़ लिखकर बड़ा हुआ, नौकरी लगी और उसने शादी कर ली। शुरू में सब ठीक था लेकिन धीरे धीरे अर्जुन का व्यवहार बदलने लगा। वो भी ठीक वैसा ही करने लगा जैसा राजेश ने अपने माँ बाप के साथ किया था।

अर्जुन ने अलग घर ले लिया। त्योहारों पर आना बंद हो गया। फ़ोन पर बात होती थी लेकिन वो भी कम होती गई। राजेश और सुमन बड़े घर में अकेले बैठे रहते थे। राजेश के पास पैसा था, बड़ा घर था लेकिन वो सुकून नहीं था जो बेटे के पास बैठने से मिलता है।

कर्म फल का सच

एक शाम राजेश अपने घर की छत पर बैठा था और आसमान देख रहा था। तभी उसे अपने पिता की कही एक बात याद आई। पिताजी कहते थे कि बेटा, जो बोओगे वही काटोगे। जैसा करोगे वैसा भरोगे। उस दिन राजेश को समझ आया कि उसका बेटा उसके साथ वही कर रहा है जो उसने अपने माँ बाप के साथ किया था।

यही कर्म फल है। यह किसी के साथ अन्याय नहीं करता। जो जितना देता है उतना ही पाता है। बेटा बनकर, बेटी बनकर, दामाद बनकर या बहू बनकर जो भी हमारी ज़िंदगी में आता है वो सब कर्मों का हिसाब लेकर आता है। जब हिसाब पूरा हो जाता है तो रिश्ते भी बदल जाते हैं।

राजेश की नई शुरुआत

उस रात राजेश ने अर्जुन को फ़ोन किया और कहा कि बेटा मुझसे गलती हुई, मैंने अपने माँ बाप के साथ जो किया वो गलत था। मैं नहीं चाहता कि तू भी वही गलती करे जो मैंने की। आ जा, साथ बैठते हैं, बात करते हैं।

अर्जुन पहले चुप रहा लेकिन पिता की आवाज़ में जो दर्द था वो उसे भीतर तक छू गया। अगले हफ्ते अर्जुन अपनी पत्नी और बच्चों के साथ घर आया। उस दिन उस घर में बहुत दिनों बाद हँसी गूँजी।

कहानी से सीख

इस कहानी से हमें यही सीख मिलती है कि हम जो दूसरों के साथ करते हैं एक दिन वही हमारे साथ होता है। माँ बाप की सेवा करो क्योंकि तुम्हारे बच्चे तुम्हें देख रहे हैं और वही सीख रहे हैं। अच्छे कर्म करो, अच्छा फल मिलेगा। बुरे कर्म करो तो बुरा फल भी ज़रूर मिलेगा, चाहे जल्दी मिले या देर से।

कर्म फल से कोई नहीं बच सकता, न राजा, न रंक। इसलिए आज से ही अपने कर्म सुधारो क्योंकि जो आज बोओगे वही कल काटोगे।

Disclaimer: यह कहानी समाज में अच्छे संस्कार और कर्म की अहमियत को समझाने के मकसद से लिखी गई है। इसमें दिए गए पात्र और घटनाएं काल्पनिक हैं। इस कहानी का मकसद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं बल्कि जीवन में अच्छे कर्म करने की प्रेरणा देना है।

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